भारत दर्शन यात्रा : एक संस्मरण …… 30-12-2023

 भारत दर्शन यात्रा : एक संस्मरण ……

30-12-2023

प्रातः काल में तिरुपति शहर से हमारा दल कांचीपुरम के लिए रवाना हुआ और लगभग दो घंटे में हम कांची पहुँच गए।काँचीपुरम जिसे केवल काँची भी कहा जाता हैभारत के तमिलनाडु राज्य के काँचीपुरम ज़िले में स्थित एक नगर है। यह ज़िले का मुख्यालय भी है। मोक्षदायिनी सप्त पुरियों अयोध्यामथुराद्वारकामाया(हरिद्वार), काशी और अवन्तिका (उज्जैनमें कांचीपुरम की भी गणना है। कांची हरिहरात्मक पुरी है। इसके दो भाग शिवकांची और विष्णुकांची हैं।कांची हिन्दूधर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ है और यहाँ बहुत प्राचीन मंदिर हैं। यह हिन्दू धार्मिक शिक्षा का भी शताब्दियों से केन्द्र रहा है। कांची पलार नदी के किनारे स्थित है। यह अपनी रेशमी साड़ियों के लिए भी प्रसिद्ध है। कांचीपुरम तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई के बृहद् महानगर क्षेत्र में आता है।

कांची का अर्थ (ब्रह्मा), आंची का अर्थ (पूजाऔर पुरम का अर्थ (शहरहोता है यानी ब्रह्मा को पूजने वाला पवित्र स्थान। शायद इसलिए यहाँ विष्णु के अनेक मंदिर स्थापित किए गये हैंजिस कारण इसे यह नाम दिया गया है।

मान्यता है कि इस क्षेत्र में प्राचीन काल में ब्रह्माजी ने देवी के दर्शन के लिये तप किया था। ऐसा माना जाता है कि जो भी यहाँ जाता हैउसे आंतरिक आनंद के साथ-साथ मोक्ष की प्राप्ति भी होती है। पुराणों मे कहा गया है कि "पुष्पेशु जातिपुरुषेशु विष्णुनारीशु रम्भानगरेशु कांची।

यहाँ कई बडे़ मन्दिर हैंजैसे वरदराज पेरुमल मन्दिर भगवान विष्णु के लियेभगवान शिव के पांचरूपों में से एक को समर्पित एकाम्बरनाथ मन्दिरकामाक्षी अम्मन मन्दिरकुमारकोट्टमकच्छपेश्वरमन्दिरकैलाशनाथ मन्दिरइत्यादि। उत्तरी तमिलनाडु में स्थित कांचीपुरम भारत के सात सबसेपवित्र शहरों में एक माना जाता है। हिन्दुओं का यह पवित्र तीर्थस्थल हजार मंदिरों के शहर के रूपमें चर्चित है। आज भी कांचीपुरम और उसके आसपास 126 शानदार मंदिर देखे जा सकते हैं। यहशहर चैन्नई से 45 मील दक्षिण पश्चिम में वेगवती नदी के किनार बसा है। कांचीपुरम प्राचीन चोलऔर पल्लव राजाओं की राजधानी थी। नगर के प्रमुख मंदिरों का विवरण इस प्रकार से हैं।

1. एकम्बारानाथर मंदिर

एकाम्बरेश्वर मंदिर एक अति प्राचीन ओर भव्य मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर कोपल्लवों ने बनवाया था। बाद में इसका पुर्ननिर्माण चोल और विजयनगर के राजाओं ने करवाया।11 खंड़ों का यह मंदिर दक्षिण भारत के सबसे ऊंचे मंदिरों में एक है। मंदिर में बहुत आकर्षक मूर्तियांदेखी जा सकती हैं। साथ ही यहां का 1000 पिलर का मंडपम भी खासा लोकप्रिय है।

ग्रथों के अनुसार, इस मंदिर मे अनेक बरसों से एक आम का पेड़ है जो लगभग 3500-4000 वर्षपुराना है। इस पेड़ की हर शाखा पर अलग-अलग रंग के आम लगते है और इनका स्वाद भी अलगअलग है। इस पेड़ के नीचे माँ पार्वती ने भगवान महादेव शिव की पूजा की थी और माता पार्वती ने शिव जी को प्राप्त करने के लिएउसी आम के पेड़ के नीचे मिटटी या बालू से ही एक शिवलिंग बनाकर घोर तपस्या करनी शुरू कर दी। जब शिवजी ने ध्यान मग्न पार्वती जी को तपस्या करते हएदेखा तो महादेव ने माता पार्वती की परीक्षा लेने के उद्देश्य से अपनी जटा से गंगा जल को बहानाशुरू दिया। जब जल ी तेज गति से पूजा मे बाधा पड़ने लगी तो माता पार्वती ने उस शिवलिंगजिसकी वह पूजा कर रही थी को गले लगा लिया जिससे शिव लिंग को कोई नुकसान  हो।भगवान शंकर जी यह सब देख कर बहुत प्रसन्न हए और माता पार्वती को दर्शन दिये। शिव जी नेमाता पार्वती से वरदान मांगने को कहा तो माता पार्वती ने विवाह की इच्छा व्यक्त की। महादेव नेमाता पार्वती से विवाह कर लिया। आज भी मंदिर के अंदर वह आम का पेड़ हरा भरा देखा जासकता है। माता पार्वती और शिव जी को समर्पित यह मंदिर एकम्बरनाथ मंदिर है।

2. कामाक्षी अम्मन मंदिर 

 यह मंदिर देवी शक्ति के तीन सबसे पवित्र स्थानों में एक है। मदुरै और वाराणसी अन्य दो पवित्रस्थल हैं। 1.6 एकड में फैला यह मंदिर नगर के बीचोंबीच स्थित है। मंदिर को पल्लवों ने बनवायाथा। बाद में इसका पुनरोद्धार 14 वीं और 17वीं शताब्दी में करवाया गया। कहा गया है कि 

कांची तु कामाक्षीमदुरै मीनाक्षी

दक्षिणे कन्याकुमारी ममः।

शक्ति रूपेण भगवती

नमो नमः नमो नमः॥

यह मंदिर कांचीपुरम के शिवकांची में स्थित है। कामाक्षी देवी मंदिर देश की 51 शक्ति पीठों मेंसंमिलित है। मंदिर में कामाक्षी देवी की आकर्षक प्रतिमा है। यह भी कहा जाता है कि कांची मेंकामाक्षीमदुरै में मीनाक्षी और काशी में विशालाक्षी विराजमान हैं। मीनाक्षी और विशालाक्षीविवाहिता हैं। इष्टदेवी देवी कामाक्षी खड़ी मुद्रा में होने की बजाय बैठी हुई मुद्रा में हैं। देवी पद्मासन(योग मुद्रामें बैठी हैं और दक्षिण-पूर्व की ओर देख रही हैं।

मंदिर परिसर में गायत्री मंडपम भी है। कभी यहां चंपक का वृक्ष हुआ करता था। मां कामाक्षी केभव्य मंदिर में भगवती पार्वती का श्रीविग्रह हैजिसे कामाक्षीदेवी या कामकोटि भी कहते हैं। भारतके द्वादश प्रधान देवी-विग्रहों में से यह एक मंदिर है। इस मंदिर परिसर के अंदर चारदीवारी के चारोंकोनों पर निर्माण कार्य किया गया है। एक कोने पर कमरे बने हैं तो दूसरे पर भोजनशालातीसरे परहाथी स्टैंड और चौथे पर शिक्षण संस्थान बना है। कहा जाता है कि कामाक्षी देवी मंदिर मेंआदिशंकराचार्य की काफी आस्था थी। उन्होंने ही सबसे पहले मंदिर के महत्व से लोगों को परिचितकराया। परिसर में ही अन्नपूर्णा और शारदा देवी के मंदिर भी हैं।

यह भी कहा जाता है कि देवी कामाक्षी के नेत्र इतने सुंदर हैं कि उन्हें कामाक्षी संज्ञा दी गई। वास्तवमें कामाक्षी में मात्र कमनीयता ही नहींवरन कुछ बीजाक्षरों का यांत्रिक महत्व भी है। यहां पर 'कार ब्रह्मा का, 'कार विष्णु का और 'कार महेश्वर का प्रतीक है। इसीलिए कामाक्षी के तीननेत्र त्रिदेवों के प्रतिरूप हैं। सूर्य-चंद्र उनके प्रधान नेत्र हैं। अग्नि उनके भाल पर चिन्मय ज्योति सेप्रज्ज्वलित तृतीय नेत्र है। कामाक्षी में एक और सामंजस्य है 'कासरस्वती का, 'मांमहालक्ष्मी काप्रतीक है। इस प्रकार कामाक्षी के नाम में सरस्वती तथा लक्ष्मी का युगल-भाव समाहित है।

 3. कैलाशनाथ मंदिर 

यह मंदिर शहर के पश्चिम दिशा में स्थित कांचीपुरम का सबसे प्राचीन और दक्षिण भारत के सबसेशानदार मंदिरों में एक है। इस मंदिर को आठवीं शताब्दी में पल्लव वंश के राजा नरसिंहवर्मनद्वितीय ने अपनी पत्नी की प्रार्थना पर बनवाया था। मंदिर के अग्रभाग का निर्माण राजा के पुत्र महेन्द्रवर्मन तृतीय के करवाया था। मंदिर में देवी पार्वती और शिव की नृत्य प्रतियोगिता को दर्शाया गयाहै।

  1. बैकुंठ पेरूमल मंदिर

भगवान विष्णु को समर्पित इस मंदिर का निर्माण सातवीं शताब्दी में पल्लव राजा नंदीवर्मनपल्लवमल्ला ने करवाया था। मंदिर में भगवान विष्णु को बैठेखड़े और आराम करती मुद्रा में देखाजा सकता है। मंदिर की दीवारों में पल्लव और चालुक्यों के युद्धों के दृश्य बने हुए हैं। मंदिर में1000 स्तम्भों वाला एक विशाल हॉल भी है जो पर्यटकों को बहुत आकषित करता है। प्रत्येकस्तम्भ में नक्काशी से तस्वीर उकेरी गई हैं जो उत्तम कारीगर की प्रतीक हैं।

  1. वरदराज मंदिर

भगवान विष्णु को समर्पित इस मंदिर में उन्हें देवराजस्वामी के रूप में पूजा जाता है। मंदिर में 100 स्तम्भों वाला एक हाल है जिसे विजयनगर के राजाओं ने बनवाया था।  

  आज का सारा दिन पावन नगरी काशी के अलग-अलग मंदिरों के दर्शन करने में लग गया।दक्षिण भारत की विशिष्ट पैगोडा शैली में निर्मित यहाँ के मंदिर भारत की वैभवशाली प्राचीन विरासत का जीता जागता उदाहरण हैं।


लायक़ राम शर्मा

शिमला

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