भारत दर्शन यात्रा: एक संस्मरण…… 06~01~2024

भारत दर्शन यात्रा: एक संस्मरण……

06~01~2024


एक लंबी यात्रा के पश्चात छह जनवरी को दोपहर बाद हमारा यात्री दल महाराष्ट्र जिला के शनि शिंगणापुर पहुँचा।होटल में कुछ समय विश्राम करने के पश्चात संध्याकालीन आरती के लिए हम मंदिर परिसर गए।भगवान शनिदेव के भव्य और अलौकिक दर्शन कर मन प्रसन्नचित्त था। इस छोटे से गाँव की हर बात निराली है।

     शनि शिंगणापुर भारत के महाराष्ट्र राज्य के अहमदनगर ज़िले के नवासे तहसील स्थित अहमदनगर-औरंगाबाद राज्य मार्ग 60 पर घोड़ेगाँव से 5 कि॰मी॰ दूरी पर बसा हुआ है।यह गाँव अपने शनि देवता मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। लगभग तीन हजार जनसंख्या के शनि शिंगणापुर गाँव में किसी भी घर में दरवाजा नहीं है।कहीं भी कुंडी तथा कड़ी लगाकर ताला नहीं लगाया जाता। इतना ही नहीं घर में लोग अलमारी तथा सूटकेस आदि नहीं रखते। ऐसा शनि भगवान की आज्ञा से किया जाता है।

लोग घर की मूल्यवान वस्तुएँगहनेकपड़ेरुपए-पैसे आदि रखने के लिए थैली तथा डिब्बे का प्रयोग करते हैं। केवल पशुओं से रक्षा होइसलिए बाँस का ढँकना दरवाजे पर लगाया जाता है।

गाँव छोटा हैपर लोग समृद्ध हैं। इसलिए अनेक लोगों के घर आधुनिक तकनीक से ईंट-पत्थर तथा सीमेंट का इस्तेमाल करके बनाए गए हैं। फिर भी दरवाजों में किवाड़ नहीं हैं। यहाँ दो मंजिला मकान भी नहीं है। यहाँ पर कभी चोरी नहीं हुई। यहाँ आने वाले भक्त अपने वाहनों में कभी ताला नहीं लगाते। कितना भी बड़ा मेला क्यों  होकभी किसी वाहन की चोरी नहीं हुई।

शनि भगवान की स्वयंभू मूर्ति काले रंग की है। 5 फुट 9 इंच ऊँची  1 फुट 6 इंच चौड़ी यह मूर्ति संगमरमर के एक चबूतरे पर धूप में ही विराजमान है। यहाँ शनिदेव अष्ट प्रहर धूप होआँधी होतूफान हो या जाड़ा होसभी ऋतुओं में बिना छत्र धारण किए खड़े हैं। राजनेता  प्रभावशाली वर्गों के लोग यहाँ नियमित रूप से एवं साधारण भक्त हजारों की संख्या में देव दर्शनार्थ प्रतिदिन आते हैं।

प्रत्येक शनिवार को तथा शनिवार के दिन आने वाली अमावस को महाराष्ट्र के कोने-कोने से दर्शनाभिलाषी यहाँ आते हैं तथा शनि भगवान की पूजाअभिषेक आदि करते हैं। प्रतिदिन प्रातः 4 बजे एवं सायंकाल 5 बजे यहाँ आरती होती है। शनि जयंती पर जगह-जगह से प्रसिद्ध ब्राह्मणों को बुलाकर 'लघुरुद्राभिषेककराया जाता है। यह कार्यक्रम प्रातः 7 से सायं 6 बजे तक चलता है।

हिन्दू धर्म में कहते हैं कि कोबरा का काटा और शनि का मारा पानी नहीं माँगता। शुभ दृष्टि जब इसकी होती हैतो रंक भी राजा बन जाता है। देवताअसुरमनुष्यसिद्धविद्याधर और नाग ये सब इसकी अशुभ दृष्टि पड़ने पर समूल नष्ट हो जाते हैं। परंतु यह स्मरण रखना चाहिए कि यह ग्रह मूलतः आध्यात्मिक ग्रह है। महर्षि पाराशर ने कहा कि शनि जिस अवस्था में होगाउसके अनुरूप फल प्रदान करेगा। जैसे प्रचंड अग्नि सोने को तपाकर कुंदन बना देती हैवैसे ही शनि भी विभिन्न परिस्थितियों के ताप में तपाकर मनुष्य को उन्नति पथ पर बढ़ने की सामर्थ्य एवं लक्ष्य प्राप्ति के साधन उपलब्ध कराता है। नवग्रहों में शनि को सर्वश्रेष्ठ इसलिए कहा जाता हैक्योंकि यह एक राशि पर सबसे ज्यादा समय तक विराजमान रहता है। श्री शनि देवता अत्यंत जाज्वल्यमान और जागृत देवता हैं। आजकल शनि देव को मानने के लिए प्रत्येक वर्ग के लोग इनके दरबार में नियमित हाजिरी दे रहे हैं।

ओऊम निलांजल समाभासम्,

रवि पुत्रम यमाग्रजम्। 

छाया मार्तंडसम्भुतम् 

तम् नमामि शनैश्चरम्॥

हमारा आज का रात्रि विश्राम शनि शिंगणापुर में ही था।

लायक राम शर्मा 

शिमला

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