भारत दर्शन यात्रा: एक संस्मरण.....22-23/12/2023
22 दिसंबर को हमारा क़ाफ़िला कलकत्ता से आगे बढ़ गया।आज का लगभग सारा दिन सफ़र में ही बीत गया। रात्रि विश्राम रास्ते में बालासौर नामक स्थान पर किया और अगली सुबह फिर से हमारी यात्रा शुरू हुई।लगभग दोपहर के समय हम उड़ीसा के साक्षी गोपाल मंदिर में पहुँच चुके थे। ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु के जगन्नाथपुरी धाम दर्शन से पूर्व साक्षी गोपाल के दर्शन करना अनिवार्य है, तभी जगन्नाथपुरी की यात्रा पूर्ण मानी जाती है। आज मन में एक विशेष अनुभूति थी क्योंकि यह इस लंबी यात्रा का वो पड़ाव था जहाँ भगवान विष्णु के प्रथम धाम यानी निवास स्थान जगन्नाथपुरी के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होना था।
पूरे यात्री दल ने सखी गोपाल मंदिर में भगवान के साक्षीगोपाल रूप के दर्शन किए।
सखी गोपाल मंदिर जिसे औपचारिक रूप से सत्यवादी गोपीनाथ मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, भगवान गोपीनाथ को समर्पित एक मध्ययुगीन मंदिर है, जो ओडिशा में पुरी भुवनेश्वर राजमार्ग पर सखीगोपाल में स्थित है। मंदिर का निर्माण कलिंग वास्तु शैली में किया गया है।
स्थानीय किंवदंती के अनुसार ऐसा माना जाता है कि गांव का एक गरीब युवक, जिसका नाम बाद में साक्षीगोपाला पड़ा, गांव के मुखिया की बेटी से प्यार करने लगा। हालांकि, उच्च आर्थिक स्थिति होने के कारण मुखिया ने इस युवक और अपनी बेटी के बीच विवाह का विरोध किया। मुखिया और युवक सहित गांव के लोग वृंदावन की तीर्थ यात्रा पर गए। गांव का मुखिया बीमार पड़ गया और उसे साथी ग्रामीणों ने छोड़ दिया। युवक ने उसकी इतनी अच्छी तरह से देखभाल की कि वह जल्द ही ठीक हो गया और कृतज्ञता में उसने अपनी बेटी की शादी युवक से करने का वादा किया। जैसे ही वे गांव लौटे, मुखिया अपने वादे से मुकर गया और युवक से अपने दावे के समर्थन में गवाह पेश करने को कहा।
भगवान गोपाला, युवक की भक्ति से प्रभावित होकर, एक शर्त पर वादे की गवाही देने के लिए आने को तैयार हो गए: कि युवक रास्ता दिखाए, और वह उसका अनुसरण करे। लेकिन शर्त यह थी कि युवक को कभी पीछे मुड़कर नहीं देखना होगा । वह रेत के एक टीले को पार करते हुए गाँव की ओर चल पड़े । जब वे वहाँ से गुजरे, तो वह युवक भगवान के कदमों की आवाज़ नहीं सुन सका और मुड़कर पीछे देखा। तुरंत भगवान उस स्थान पर जड़ से जड़ जमाए पत्थर की मूर्ति में बदल गए। गाँव वाले इस बात से बहुत प्रभावित थे कि भगवान खुद युवक के इस दावे का समर्थन करने आए। कालांतर में युवक की शादी मुखिया की बेटी से हुई और उस युवक को भगवान गोपाला (जो गवाही देने आए थे) के सम्मान में बनाए गए मंदिर का पहला पुजारी नियुक्त किया गया।
साक्षीगोपाल मंदिर में प्रसाद चावल की जगह गेहूँ से बनाया जाता है। यह दुनिया भर के विष्णु मंदिरों की पूजा प्रक्रियाओं में से एक असाधारण प्रसाद है।
सखी गोपाल मंदिर में दर्शन के पश्चात हम जगन्नाथ पुरी जोकि यहाँ से लगभग 20 किलोमीटर दूर है की तरफ़ चल पड़े। आज का रात्रि विश्राम जगन्नाथ पुरी में था।
लायक़ राम शर्मा
शिमला
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