भारत दर्शन यात्रा: एक संस्मरण.....21-12-2023
कलकत्ता प्रवास में आज का दिन बहुत व्यस्ततम रहने वाला था।सुबह लगभग 4 बजे ही हमारा यात्री दल गंगा सागर के लिए बसों में रवाना हुआ।लगभग दो घंटे के सफ़र के पश्चात हम सागर के तट पर पहुँच गये। इसके पश्चात स्टीमर के माध्यम से सागर के एक हिस्से को पार करने में लगभग 30-35 मिनट लगे। गंगासागर के जिस हिस्से में हम स्टीमर के माध्यम से पहुँचे थे, वहाँ से गंगा नदी (जिसे पश्चिमी बंगाल में हुगली के नाम से जाना जाता है)और सागर के संगम स्थल को जाने के लिए हमें फिर से रिक्शा लेना पड़ा। लगभग एक घंटे के सफ़र के लिए पश्चात हम गंगा सागर तट पर पहुँच गये,जहाँ पर स्नान के उपरांत कपिल मुनि के आश्रम में पूजा अर्चना की।
गंगासागर भारतीय राज्य पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के काकद्वीप उपखंड में सागर सीडी ब्लॉक में एक गांव और एक ग्राम पंचायत है ।
गंगासागर एक हिंदू तीर्थस्थल है। हर साल मकर संक्रांति (14 जनवरी) के दिन , लाखों हिंदू गंगा नदी और बंगाल की खाड़ी के संगम पर पवित्र स्नान करने और कपिला मंदिर में प्रार्थना ( पूजा ) करने के लिए इकट्ठा होते हैं।
गंगासागर मेला और तीर्थयात्रा प्रतिवर्ष सागर द्वीप के दक्षिणी सिरे पर आयोजित की जाती है, जहाँ गंगा बंगाल की खाड़ी में प्रवेश करती है। इस संगम को गंगासागर भी कहा जाता है। संगम के पास कपिल मुनि का मंदिर है।
क्षेत्रीय किंवदंती के अनुसार , कर्दम ने विष्णु के साथ एक समझौता किया, जिसमें उन्होंने वैवाहिक जीवन की कठोरताओं को सहने के लिए सहमति व्यक्त की, इस शर्त पर कि देवता उनके पुत्र के रूप में अवतार लेंगे। जैसा कि तय हुआ, कपिल मुनि ने विष्णु के अवतार के रूप में जन्म लिया और एक महान संत बन गए। माना जाता है कि कपिल मुनि का आश्रम इसी गाँव में स्थित था। एक दिन राजा सगर का बलि का घोड़ा, जो उनके अश्वमेध यज्ञ समारोह के प्रदर्शन के लिए आवश्यक था, गायब हो गया; इसे इंद्र ने चुरा लिया था।
राजा ने अपने 60,000 पुत्रों को घोड़ा खोजने के लिए भेजा, और उन्होंने इसे कपिल मुनि के आश्रम के पास पाया, जहाँ इंद्र ने इसे छिपाया था। कपिल मुनि को चोर समझकर पुत्रों ने चोरी का आरोप ऋषि पर लगाया। कपिल मुनि ने झूठे आरोप पर क्रोध में आकर पुत्रों को जलाकर राख कर दिया और उनकी आत्माओं को नरक में भेज दिया । बाद में राजा के पुत्रों के लिए दया करते हुए, कपिल मुनि ने सगर के वंशजों की प्रार्थना को स्वीकार कर लिया और पुत्रों की बहाली के लिए सहमत हो गए, बशर्ते देवी गंगा पृथ्वी पर उतरकर सगर के पुत्रों के लिए राख को पवित्र जल के साथ मिलाने का तर्पण अनुष्ठान करें।
तपस्या के माध्यम से राजा भगीरथ ने भगवान शिव को गंगा को स्वर्ग से नीचे लाने के लिए आग्रह किया। इस प्रकार से राजा सगर के 60,000 पुत्रों को मुक्ति ( मोक्ष ) मिली और वे स्वर्ग चले गए, लेकिन गंगा नदी धरती पर ही रही। गंगा के अवतरण की तिथि ग्रेगोरियन कैलेंडर के जनवरी के 15वें दिन को माना जाता है, जो मकर संक्रांति के पालन के साथ मेल खाता है। इस अवसर पर सूर्य देव, मकर नक्षत्र (हिंदू कैलेंडर के उत्तरायण) में प्रवेश करते हैं।
हिमालय की वादियों से लगातार सफ़र करते हुए पश्चिमी बंगाल के सुदूर बंगाल की खाड़ी और गंगा के मिलन को निहारना सचमुच में रोमांचित कर देने वाला एहसास था।जिस प्रकार एक जीवात्मा संपूर्ण जीवन की यात्रा संपन्न करके परम पिता परमेश्वर अर्थात परमात्मा में लीन हो जाती है; ठीक उसी प्रकार माँ गंगा गंगोत्री से निकलकर अविरल बहती हुई कपिल मुनि के आश्रम के नज़दीक सागर में मिलकर पूर्णता को प्राप्त कर लेती है। भौगोलिक ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी गंगा का सागर से यह मिलन मानव के लिए एक बहुत बड़ा संदेश देता है।मेरा ऐसा मानना है कि जो भी व्यक्ति गंगा और सागर के इस मिलन को देखता है, उसका जीवन को देखने और समझने का नज़रिया निश्चित रूप से बदल जाता है और शायद यही कारण है कि गंगा सागर तीर्थ को हिन्दू धर्म मान्यताओं में सबसे बड़ा तीर्थ कहा गया है।शायद यहाँ पहुँच कर ही मैं इस बात की सार्थकता को समझ पाया हूँ कि “सारे तीर्थ बार बार गंगासागर एक बार”।
कपिल मुनि के आश्रम से काफ़ी समय तक हम गंगा और सागर के मिलन को निहारते रहे। मानो हम सभी इन अलौकिक पलों को सदा सर्वदा के लिए अपने मानस पटल पर अंकित कर देना चाहते थे। लेकिन अब वक़्त आ गया था जब हमें इस छोटे से द्वीप को छोड़ना था और हमारी कलकत्ता शहर के लिए हमारी वापसी यात्रा शुरू हो गई थी। आज शाम को हमारा ठहराव कलकत्ता शहर में ही था।
लायक राम शर्मा
शिमला
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