भारत दर्शन यात्रा: एक संस्मरण.....07-12-2023

भारत दर्शन यात्रा: एक संस्मरण.....
07-12-2023

7 दिसंबर का दिन भगवान विष्णु के रामावतार की नगरी अयोध्या के दर्शन के लिए समर्पित था। अयोध्या सप्तपुरियों अर्थात् भारत के सात सबसे पवित्र एवं धार्मिक शहरों में से एक माना जाता है। अतः हिंदू धर्म एवं आस्था की प्रतीक इस नगरी को देखने के लिए हम लालायित थे।
अयोध्या भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में सरयू नदी के तट पर स्थित एक शहर है। यह अयोध्या ज़िले के साथ-साथ भारत के उत्तर प्रदेश के अयोध्या मंडल का प्रशासनिक मुख्यालय है।
अयोध्या को ऐतिहासिक रूप से साकेत के नाम से जाना जाता है । प्रारंभिक बौद्ध और जैन विहित ग्रंथों में उल्लेख है कि गौतम बुद्ध और भगवान महावीर इस शहर में आए और रहे । जैन ग्रंथों में इसे पांच तीर्थंकरों ऋषभनाथ, अजितनाथ, अभिनंदननाथ, सुमतिनाथ और अनंतनाथ की जन्मस्थली के रूप में भी वर्णित किया गया है।
 पौराणिक कथाओं में इसे चक्रवर्ती सम्राट भरत के साथ भी जोड़ा गया है।
 गुप्त काल के बाद से, कई स्रोतों में अयोध्या और साकेत का एक ही शहर के नाम के रूप में उल्लेख किया गया है।
पौराणिक शहर अयोध्या का उल्लेख रामायण में भी हुआ है। यह भगवान विष्णु के रामावतार की जन्मस्थली है। यही विश्वास अयोध्या को हिंदुओं के लिए अत्यंत पवित्र शहर के रूप में प्रतिष्ठित होने का मुख्य कारण है। राम के जन्मस्थान के रूप में मान्यता के कारण, अयोध्या को हिंदुओं के सात सबसे महत्त्वपूर्ण तीर्थ स्थलों अर्थात् सप्तपुरियों में से पहला माना गया है। 
ऐसा माना जाता है कि राम के कथित जन्म - स्थान पर एक मंदिर था, जिसे मुगल सम्राट बाबर या औरंगज़ेब के आदेश से ध्वस्त कर दिया गया था और उसके स्थान पर एक मस्जिद बनाई गई थी।
 1992 में, उस स्थान पर विवाद के कारण हिंदू भीड़ द्वारा मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया, जिसका उद्देश्य उस स्थान पर राम के एक भव्य मंदिर का पुनर्निर्माण करना था। सुप्रीम कोर्ट की पांच-न्यायाधीशों की पूर्ण पीठ ने अगस्त से अक्तूबर, 2019 तक स्वामित्व मामलों की सुनवाई की और फैसला सुनाया कि कर रिकॉर्ड के अनुसार भूमि सरकार की थी, और इसे हिंदू मंदिर बनाने के लिए एक ट्रस्ट को सौंपने का आदेश दिया। इसने सरकार को वैकल्पिक 5 एकड़ देने का भी आदेश दिया। ध्वस्त बाबरी मस्जिद के बदले में अयोध्या में मस्जिद बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को ज़मीन दी जाएगी। राम मंदिर का निर्माण अगस्त 2020 में शुरू हुआ और निर्माण कार्य पूर्ण करके 22 जनवरी , 2024 में श्री राम लला की प्राण - प्रतिष्ठा भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में पूर्ण हुई। इसके साथ ही पिछली पांच सदियों का विवाद खत्म हुआ। आज देश में ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण विश्व में श्री राम जन्मभूमि अयोध्या में प्राण - प्रतिष्ठा का कार्य पूरा होने पर घर-घर दीप जला कर खुशियां मनाई गईं। ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे कलियुग में त्रेता युग का आगमन हो गया हो।
   7 दिसंबर को सुबह सर्वप्रथम भगवान राम के प्रति अपार श्रद्धा एवं भक्ति मन में लिए हमारा यात्री दल पवित्र सरयू नदी के तट पर गया और वहां पर सभी ने स्नान किया। मां सरयू का अलौकिक दर्शन कर सभी हर्षित थे। ऐसा माना जाता है कि सरयू के तट पर गऊदान का बहुत महत्त्व है। इसलिए हम में से बहुत सारे लोगों ने गऊदान किया।
तत्पश्चात अयोध्या के प्रसिद्ध मंदिर कनक - भवन तथा मां सीता की पावन रसोई को देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मां सीता की रसोई में भगवान राम के चरित्र से संबंधित महत्त्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के पश्चात् हम एक बार वापस दोपहर के भोजन के लिए चले गए।
भोजन के उपरांत अब बारी थी निर्माणाधीन भव्य राम मंदिर के दर्शन की। हमारा काफिला पश्चिमी द्वार से राम मंदिर के दर्शन के लिए चल पड़ा। मन में उल्लास था। भगवान राम की जन्मस्थली को देखने के लिए हम आतुर थे। आखिरकार जीवन का वह पल आ गया जब हमें राम जन्मभूमि के साक्षात दर्शन का अलौकिक सौभाग्य मिला।
 पिछली लगभग पांच सदियों से विवादास्पद भूखंड पर हिंदुओं की आन बान और शान मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का भव्य मंदिर लगभग बन करके तैयार था। हालांकि हम मंदिर के अंदर नहीं जा सके और जिस स्थान पर रामलला की मूर्ति विराजमान थी हमने वहीं पर भगवान के दर्शन किए और हम दूसरी तरफ से बाहर निकल आए। भगवान राम के दर्शन के पश्चात् हम हनुमानगढ़ी गए जहां पर भगवान राम के प्रिय हिंदुओं के बजरंगबली विराजमान हैं। हनुमानगढ़ी एक छोटे से टीले पर विराजमान है जहां से हनुमान जी भगवान राम की नगरी अयोध्या पर आज भी नज़र रखते हैं। इसके पश्चात् अयोध्या के बाकी पावन स्थलों को निहारने के पश्चात् एक बार पुनः हम रात्रि विश्राम के लिए अपने गंतव्य स्थान की तरफ रवाना हो गए।
लायक राम शर्मा
 शिमला

1 comment:

  1. धर्म और इतिहास का भव्यतापूर्ण सम्मिश्रण..

    ReplyDelete

भारत दर्शन यात्रा: एक संस्मरण 23 जनवरी 2024

भारत दर्शन यात्रा: एक संस्मरण 23 जनवरी 2024 अगली प्रातः हमारा यात्री दल सुबह-सबेरे ही कृष्ण जन्मभूमि मथुरा में दर्शन के लिए पहुँच गया। आज का...