भारत दर्शन यात्रा: एक संस्मरण 21~22 जनवरी 2024

भारत दर्शन यात्रा: एक संस्मरण

21~22 जनवरी 2024

21 जनवरी को प्रातः हम पुष्कर से वृंदावन के लिए रवाना हुए और सायंकाल को भगवान कृष्ण की लीला स्थली वृंदावन पहुँच गये। अगली प्रातः वृंदावन के सभी प्रमुख मंदिरों में दर्शन किए और यमुना के विभिन्न घाटों पर गए। वृंदावन के कण कण में भगवान कृष्ण की अनुभूति है।

वृन्दावन, भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के मथुरा ज़िले में स्थित एक महत्वपूर्ण धार्मिक व ऐतिहासिक नगर है। वृन्दावन भगवान श्रीकृष्ण की लीला से जुडा हुआ है। यह स्थान श्री कृष्ण की कुछ अलौकिक बाल लीलाओं का केन्द्र माना जाता है। यहाँ विशाल संख्या में श्री कृष्ण और राधा रानी के मन्दिर हैं। बांके विहारी जी का मंदिर, श्री गरुड़ गोविंद जी का मंदिर व राधावल्लभ लाल जी का, ठा.श्री पर्यावरण बिहारी जी का मंदिर बड़े प्राचीन हैं। इसके अतिरिक्त यहाँ श्री राधारमण, श्री राधा दामोदर, राधा श्याम सुंदर, गोपीनाथ, गोकुलेश, श्री कृष्ण बलराम मन्दिर, पागलबाबा का मंदिर, रंगनाथ जी का मंदिर, प्रेम मंदिर, श्री कृष्ण प्रणामी मन्दिर, अक्षय पात्र, वैष्णो देवी मंदिर। निधि वन, श्री रामबाग मन्दिर आदि भी दर्शनीय स्थान है।

यह कृष्ण की लीलास्थली है। हरिवंशपुराण, श्रीमद्भागवत, विष्णु पुराण आदि में वृन्दावन की महिमा का वर्णन किया गया है। कालिदास ने इसका उल्लेख रघुवंश में इंदुमती-स्वयंवर के प्रसंग में शूरसेनाधिपति सुषेण का परिचय देते हुए किया है। इससे कालिदास के समय में वृन्दावन के मनोहारी उद्यानों के अस्तित्व का भान होता है। श्रीमद्भागवत के अनुसार गोकुल से कंस के अत्याचार से बचने के लिए नंदजी कुटुंबियों और सजातीयों के साथ वृन्दावन में निवास के लिए आये थे। विष्णु पुराण में इसी प्रसंग का उल्लेख है। विष्णुपुराण में भी वृन्दावन में कृष्ण की लीलाओं का वर्णन है।

वर्तमान में टटिया स्थान, निधिवन, सेवाकुंज, मदनटेर, बिहारी जी की बगीची, रामबाग, लता भवन (प्राचीन नाम टेहरी वाला बगीचा) आरक्षित वनी के रूप में दर्शनीय हैं। निधि वन श्री बांके बिहारी जी मन्दिर से करीब में ही है। यहां की मान्यता है कि यहीं भगवान कृष्ण गोपियों संग रास रचाते थे। किंवदंती है कि आज भी रात में रास रचाते हैं।

वृंदावन का जन्म

द्वापरयुग के आरम्भ में जब पृथ्वी पर बहुत पाप बढ़ने लगा तो सभी देवता भगवान के पूर्णावतार वामन रूप के बाये चरण के अंगूठे के नख से फटे ब्रह्माण्ड के ऊपर हुए छिद्र से बाहर निकल कर ( नासा और विज्ञान जिसे ब्लैक होल कहता है) जब ऊपर स्थित गोलोक (गेलेक्सी) में गये तो वहाँ पर उन्हें बहुत आश्चर्य हुआ।

वामपादां गुष्ठनखभिन्न ब्रह्मांडमस्तके ॥श्रीवामनस्यविवरे ब्रह्मद्रवसमाकुले ॥

उसी गोलोक में गोवर्धन पर्वत के संग वृंदावन भी शोभित था, ये सभी ने देखा।

अथदेवगणाः सर्वगोलोकंददृशुः परम् ।। तत्रगोवर्द्धनोनामगिरिराजोविराजते ॥ ३२ ॥ वृन्दावनंभ्राजमानंदिष्यद्रुमलताकुलम् ॥ चित्र- पक्षिमधुत्रातैर्वेशीवटविराजितम् ॥३५

आगे वर्णन आता है कि वही से श्री राधा जी के कहने पर भगवान श्री कृष्ण ने अपने उस धाम से चौरासी कोस की वृजभूमि, गोवर्धन पर्वत और यमुना नदी, इन सब को नीचे पृथ्वी लोक में लीला करने हेतु भेजा। यह वृंदावन वही से आया हुआ वृंदावन है। तभी तो इसकी रज बहुत अमूल्य है। श्रीकृष्ण आगे कहते हैं कि कभी भी वृंदावन की कण नहीं लानी चाहिए और अगर कोई लाना चाहता है तो उसे उस रज के बराबर का स्वर्ण वहीं पर दान करना चाहिए। वृंदावन के कण-कण में राधामाधव निवास करते हैं, ये यूँ ही नहीं कहा जाता।

वृंदावन का उल्लेख ऋषि श्रीपराशर दारा रचित श्रीविष्णुपुराण में भी बहुत बार किया गया है। इसके अनुसार वहाँ की भूमि काक तथा भास इत्यादि पक्षियों से व्याप्त थी। बगुलों की पंक्तियाँ वहाँ सुशोभित रहती थी। श्रीकृष्ण और बलराम के संग वहाँ पर मयूर और चातकगण सुशोभित रहते थे। गोप और गोपियाँ कदम्ब पुष्पाों से स्वयं का श्रृंगार करते थे।

वृन्दावनमितः स्थानात्तस्माद्गच्छाम मा चिरम् । यावद्भौममहोत्पातदोषो नाभिभवेद्वजम् ॥ २४ ( श्रीविष्णुपुराण, पंचम अंश, अ॰६, श्रीपराशर उचाव, श्लोक स॰२४-५१)

वहाँ पर रह कर भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन-धारण (ग्यारहवाँ अध्याय) इत्यादि बहुत सी लीलाओं को पूर्ण किया। यमुना नदी वहीं पास में ही बहती थी। प्रसिद्ध कालियानाग की लीला भी वहीं यमुना में हुई थी। यही वर्णन श्रीहरिवंशपुराण के विष्णुपर्व के पंचम अध्याय में भी आया है। (श्लोक संख्या १६-२८)

श्री मद् भागवत महापुराण के ग्यारहवें अध्याय में श्री शुकदेव राजा परीक्षित को बताते हैं कि जब श्रीकृष्ण के बाबा नंद ने देखा कि मथुरा में बहुत उत्पात होने लगे हैं तो वे सबको साथ लेकर वृन्दावन महावन जाने का फ़ैसला करते हैं। उन्होंने सुना भी था कि वृन्दावन के पास में एक बहुत बड़ा पर्वत भी है। वहाँ प्रत्येक ऋतु में सुख ही सुख रहता है। गायों के लिए वहाँ चारा भी बहुत है। तो सब लोग नंद बाबा के संग वृन्दावन में आ कर रहने लगे। जहां पर आगे चल कर भगवान श्रीकृष्ण बहुत सी लीलाओं को करते हैं।

प्राचीन वृन्दावन

कहते है कि वर्तमान वृन्दावन असली या प्राचीन वृन्दावन नहीं है। श्रीमद्भागवत के वर्णन तथा अन्य उल्लेखों से जान पड़ता है कि प्राचीन वृन्दावन तो गोवर्धन के निकट कहीं था। यह तब गोवर्धन-धारण की प्रसिद्ध कथा की स्थली वृन्दावन पारसौली (परम रासस्थली) के निकट था। अष्टछाप कवि महाकवि सूरदास इसी ग्राम में दीर्घकाल तक रहे थे। सूरदास जी ने वृन्दावन रज की महिमा के वशीभूत होकर गाया है-हम ना भई वृन्दावन रेणु।

ब्रज का हृदय

वृन्दावन को ‘ब्रज का हृदय’ कहते है जहाँ श्री राधाकृष्ण ने अपनी दिव्य लीलाएँ की हैं। इस पावन भूमि को पृथ्वी का अति उत्तम तथा परम गुप्त भाग कहा गया है। पद्म पुराण में इसे भगवान का साक्षात शरीर, पूर्ण ब्रह्म से सम्पर्क का स्थान तथा सुख का आश्रय बताया गया है। इसी कारण से यह अनादि काल से भक्तों की श्रद्धा का केन्द्र बना हुआ है। चैतन्य महाप्रभु, स्वामी हरिदास, श्री हितहरिवंश, महाप्रभु वल्लभाचार्य आदि अनेक गोस्वामी भक्तों ने इसके वैभव को सजाने और संसार को अनश्वर सम्पति के रूप में प्रस्तुत करने में जीवन लगाया है। यहाँ आनन्दप्रद युगलकिशोर श्रीकृष्ण एवं श्रीराधा की अद्भुत नित्य विहार लीला होती रहती है।

महाप्रभु चैतन्य का प्रवास

15वीं शती में चैतन्य महाप्रभु ने अपनी ब्रजयात्रा के समय वृन्दावन तथा कृष्ण कथा से संबंधित अन्य स्थानों को अपने अंतर्ज्ञान द्वारा पहचाना था। रासस्थली, वंशीवट से युक्त वृन्दावन सघन वनों में लुप्त हो गया था। कुछ वर्षों के पश्चात शाण्डिल्य एवं भागुरी ऋषि आदि की सहायता से महाप्रभु और उनके शिष्यगणों ने वृन्दावन व ब्रजमण्डल के लीलास्थलियों को पुनः प्रकाशित किया।

वृन्दावन में यमुना के घाट

वृन्दावन में यमुना के किनारे कई घाट हैं। प्रमुख घाटों में से कुछ घाट निम्नलिखित हैं:

1 श्रीवराह घाट

2. कालीयदमन घाट

3. सूर्य घाट

4. युगल घाट

5. श्रृंगार घाट

6. चीर घाट

इनके अलावा अन्य घाट जैसे महन्ताजी घाट, नामावाला घाट, कडिया घाट, धूसर घाट भी

प्रमुख मंदिर

वृन्दावन में बहुत से प्रमुख मंदिर हैं। इनमें कुछ प्रमुख मन्दिर इस प्रकार हैं:

1 बांके बिहारी मन्दिर

2. प्रेम मन्दिर

3. इस्कॉन मन्दिर

4. श्री राधा रमण मन्दिर

5. गोपेश्वर महादेव मन्दिर

6. शाहजी मन्दिर

7. श्री रघुनाथ मन्दिर

वृन्दावन भ्रमण के दौरान इन मन्दिरों को देखना एक अद्वितीय अनुभव होता है। आज पूरा दिन वृन्दावन में भ्रमण किया और रात का विश्राम यहीं किया।

लायक राम शर्मा

शिमला

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